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Saturday, September 3, 2016

नवकारसी और पौरसी

।।जय जिनेन्द्र।।

आज बात करते है नवकारसी और पौरसी करने के पीछे के विज्ञान के बारे में

नवकारसी सूर्य उदय के डेड घंटे बाद आती है और पौरसी सूर्य उदय के तीन घंटे बाद आती है और इसका सीधा सम्बन्ध सूर्य से है।

पाचन तंत्र और सूर्य का बहुत ही गहरा सम्बन्ध होता है सूर्य की गति के साथ साथ पाचन तंत्र की गति बढ़ती है,
और सूर्य उदय के समय सूर्य मंद रहता है और सूर्य के साथ साथ पाचन तंत्र भी मंद रहता है और जैसे जैसे सूर्य बढ़ता है वैसे वैसे पाचन तंत्र की क्रियासिलता भी बढ़ती है।

इसलिए जैन धर्म में कम से कम नवकारसी सब को करने की सलाह दी जाती है क्योंकि सूर्य उदय के समय पाचन तंत्र एकदम मंद पड़ा रहता है और उस समय कुछ भी खाने से बहुत देर तक वो सही ढंग से पचता नहीं जिसकी वजह से पेट से जुडी हुयी कई परेशानिया होने लगती है लंबे समय में

और पौरसी सूर्य उदय के तीन घंटे बाद आती है और उस समय सूर्य और पाचन तंत्र की स्थिति बहुत अच्छी हो जाती है फिर आप कुछ भी खाये तो कोई भी परेशानी नहीं होती है।

तीर्थंकर भगवान ने उन सब बातो को समझा, जाना फिर उसे धर्म नियम बना कर लागु कर दिया।

जैन धर्म सिर्फ कोरी बाते पे नहीं बल्कि बहुत ही सटीक वैज्ञानिक द्रष्टीकोण के साथ जैन धर्म को स्थापित किया गया।

।।जय जिनेन्द्र।।